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MediabhartiHindi
2020-05-11

भगवान ब्रह्मा की पूजा न किए जाने की बड़ी वजह

credit: third party image reference

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा ने इस जगत की रचना की। लेकिन, इसे कुदरत की एक अजीब बिडंबना ही कहा जाएगा कि जिसे सारी दुनिया का रचयिता माना जाता है, उसकी न तो पूजा करने का कोई विधान है और न ही उनके नाम का कोई खास मंदिर। हालांकि, राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा का एक मंदिर है। साथ ही, मथुरा शहर के नजदीक चौमुहां कस्बे में भी सृष्टि के इस रचयिता का एक मंदिर मिलता है।

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दरअसल, इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। एक कहानी के अनुसार, ब्रह्मा द्वारा भगवान शिव से झूठ बोलने के चलते उनकी पूजा नहीं किए जाने की बात कही जाती है।

कहानी कुछ इस तरह है कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु में एक दूसरे से अधिक श्रेष्ठ होने की बहस छिड़ गई। इस विवाद के निर्णय के लिए दोनों भगवान शिव के पास पहुंचे और निर्णय करने का अनुरोध किया।

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भगवान शिव ने इस संदेह को दूर करने के लिए अपने शरीर का आकर विशाल कर लिया और ब्रह्मा को पैरों की ओर पाताल में और विष्णु को सिर की ओर आकाश में थाह लेने के लिए भेजा। शर्त यह रखी कि जो इस काम को जल्दी करेगा, वही श्रेष्ठ कहलाएगा। काफी देर बाद भगवान विष्णु आए और माफी मांगते हुए बोले कि उन्हें भगवान शिव के सिर की कोई थाह नहीं मिली है। लेकिन, ब्रह्मा ने भगवान शिव से झूठ बोलते हुए कहा कि काफी गहराई में जाकर सिर्फ पानी ही पानी है और पानी में बहुत अंदर जाकर पाताल लोक में शिव के पैरों की थाह मिली है। इस झूठ पर भगवान शिव ने ब्रह्मा को शाप दे दिया और कहा कि जाओ तुम्हारी न तो कोई पूजा करेगा और न ही तुम्हारा कोई मंदिर बनेगा। इसी शाप के चलते कहीं भी आज तक न तो ब्रह्मा की कोई विशेष पूजा होती है और न ही कोई मंदिर है।

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