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Neeleshwriter
2020-11-27

जानिए वोल्टाइक सेल क्या होता है?

वोल्टाइक सेल भौतिक विज्ञान की सांपों के प्राथमिक सेल में से एक है। आज हम आपको इस साल की भी जानकारी देने जा रहे हैं।

credit: third party image reference

सन 18 सो के लगभग सर्वप्रथम वोल्टा नामक वैज्ञानिक ने रसायन क्रियाओं के द्वारा विद्युत वाहक बल उत्पन्न करने में सफलता प्राप्त की थी। और आपको बता देंगे जिस व्यक्ति से विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाए उसे रासायनिक सेल कहते हैं और वोल्टाइक सेल रसायनिक सेल का ही एक सेल है। क्योंकि इस सेल को वोल्टा ने बनाया था, इसीलिए इस सेल को वोल्टाइक सेल कहते हैं।

इसमें कांच के पात्र में हल्का सा गंधक अम्ल (H2So4) को इलेक्ट्रोलाइट (एक ऐसे विलयन में डाल दिया जाता है जिसमें विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसकी संरचना परिवर्तित हो जाए इलेक्ट्रोलाइट कहलाता है) के रूप में और तांबे की छड़ को एनोड तथा जस्ते की जस्ते की छड़ को एनोड़ रूप में प्रयोग की जाती है।

दोष एवं निवारण- एस्सेल में स्थानीय क्रिया एवं ध्रुवाछदान नामक दो दोस होते हैं।

स्थानीय क्रिया ( लोकल एक्शन)- जस्ता एक ऐसी धातु है जिसमें सामान्य रूप से कई प्रकार की अशुद्धियां मिली हुई होती हैं जैसे- लोहा, कार्बन, सीसा आदि इसके अंदर मिले होते हैं। जस्ते की छड़ में अशुद्धि के रूप में उपस्थित कार्बन के कण, गंधक अम्ल और जस्ते के साथ मिलकर अनेक छोटे-छोटे सेल बना लेते हैं। और इन लघु सालों में होने वाले विद्युत धारा प्रवाह में रासायनिक ऊर्जा व्यर्थ ही खर्च होती रहती है। वोल्टाइक सेल का यह दोस् स्थानीय क्रिया कहलाता है इसके निवारण के लिए जस्ते की छड़ पर पारे की परत चढ़ा दी जाती है। यह परत केवल जस्ते को ही गंधक अम्ल के संपर्क में आने देती है और अशुद्धियों को गंदक अम्ल से संपर्क नहीं करने देती। इस प्रकार यह दोस् लगभग दूर हो जाता है। जस्ते पर पारे की परत चढ़ाने की क्रिया को अलगमेशन कहते हैं।

ध्रुवाछदान- रासायनिक क्रियाओं में एनोड पर हाइड्रोजन गैस बुलबुलों के रूप में मुक्त होती है यह बुलबुले तांबे की छड़ के चारों ओर एक साथ होकर उसे अचानक बना देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कुछ समय तक कार्य करने के बाद सेल निष्क्रिय हो जाता है इसका निवारण यह है कि एनोड के चारों ओर एक शरांध्र पात्र में मैंगनीज डाइऑक्साइड चूर्ण रख दिया जाए यह चूर्ण हाइड्रोजन गैस से क्रिया करके जल बनाता है।

इस सेल का विद्युत वाहक बल 1.08 वोल्ट होता है अन्य प्रकार के परिष्कृत सेलो का निर्माण हो जाने से इस साल का प्रचलन समाप्त हो चुका है। इसीलिए आप इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते होंगे अगर आप ऐसे ही अन्य और जानकारियां पाना चाहते हैं तो हमें फॉलो कर लीजिए।

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